मैत्री भाव जगत में मेरा सब जीवों पर नित्य रहे ,दीन दुःखी जीवों पर मेरे उर से करुणा स्त्रोत बहे |
रहे भावना ऐसी मेरी सरल सत्य व्यवहार करुँ,बने जहाँ तक इस जीवन में औरों का उपकार करुँ||
कभी हार नही मानी हमने , जीत जीत बस जीत का हैं ।
दर्पण उजले अतीत का हैं , जीत जीत बस जीत का हैं |
महिला गौरव कोश द्वितीय
प्रकाशन - "महिला समाज सोसाइटी"
वर्ष - "2014"
एक ज्योति थी रास्ता दिखा गयी , हर सलाह पर लाखों जिन्दगीयां बदल गयी ,
स्वप्न दृष्टा ने देखा स्वप्न उज्जवल समाज का, उस दिशा में हम कुछ कर पाये नमन द्वारा |
एक प्रयास- स्वास्थ्य के नाम
प्रकाशन - "महिला समाज सोसाइटी"
वर्ष - "2017"
महाराणा प्रताप घास की रोटी खाकर व जंगल में रहकर सघर्ष कर सकते हैं तो -
आप घर परिवार में रहकर व (अनाज ) गेहूँ की रोटी खाकर संघर्ष क्यों नहीं कर सकते ?